बुजुर्गों की कामिनी (भाग 82)

उस दिन रविवार था। सवेरे सवेरे रेखा के घर में मैंने जो कुछ रेखा के मुख से सुना, सुनकर मुझे कोई आश्चर्य नहीं हुआ। यह तो होना ही था। सत्य तो यह था की आग मेरी ही लगाई हुई थी। उसका बेटा पंकज, अठारह साल की पढ़ने लिखने वाली उम्र में ही स्त्री संसर्ग के … Continue reading बुजुर्गों की कामिनी (भाग 82)

कामिनी की कामुक गाथा (भाग 81)

आज फिर एक नयी सुबह एक नये दिन की शुरुआत थी। खुशनुमा सुबह थी, शरीर में थकान का नामोनिशान नहीं था, प्रफुल्लित थी, तरोताजा थी। हर नये दिन के बारे में मेरी सोच बिल्कुल स्पष्ट है, हो सकता है हर दिन अच्छा न हो, लेकिन हर दिन में कुछ न कुछ तो अच्छा अवश्य होता … Continue reading कामिनी की कामुक गाथा (भाग 81)

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कामिनी की कामुक गाथा (भाग 80)

उस दिन रेखा के अठारह वर्षीय बेटे के साथ जोकुछ हुआ वह अविस्मरणीय था। अपने घर और परिसर दिखाने के बहाने मैं नें खुद को पंकज की कामुकता के हवाले कर दिया और एक अद्भुत आनंद प्राप्त करने में सफल हुई। एक उभरते हुए सुगठित शरीर वाले युवक संग रंगरेली का रसास्वादन किया। उभरता हुआ … Continue reading कामिनी की कामुक गाथा (भाग 80)

कामिनी की कामुक गाथा (भाग 79)

प्रिय पाठकों, आप सभी को मेरा वासनामय अभिवादन। पिछली कड़ी में आपनें पढ़ा कि अपनी कामुकता के वशीभूत, किस तरह अपनी सहेली रेखा के पुत्र पंकज की अंकशायिनी बनी। कहां पंकज एक अठारह वर्षीय उभरता नवयुवक, जो अभी लड़कपन की दहलीज से पूरी तरह बाहर भी नहीं निकला था और कहां मैं 41 वर्षीय, पकी … Continue reading कामिनी की कामुक गाथा (भाग 79)

कामिनी की कामुक गाथा (भाग 78)

पिछली कड़ी में आपलोगों नें पढ़ा कि किस तरह अपने निर्माणाधीन भवन में कार्यरत एक पचास पचपन की उम्र के एक दुबले पतले, काले दढ़ियल बढ़ई से मैंने अपनी कामाग्नि शांत की। एक निहायत ही अनाकर्षक व्यक्ति था वह। गंदा था वह। खिचड़ी दाढ़ी थी उसकी और खिचड़ी लंबे बाल। पता नहीं कितने दिनों से … Continue reading कामिनी की कामुक गाथा (भाग 78)

कामिनी की कामुक गाथा (भाग 77)

पिछली कड़ी में आपलोगों नें पढ़ा कि किस तरह मैं हर्षवर्धन दास, जो एक आर्किटेक्ट सह सिविल अभियंता सह बिल्डर थे, हमारे नये भवन के निर्माण की जिम्मेदारी निभा रहे थे, की कामुकता का शिकार बनी। बाप रे बाप, बड़ा ही डरावना अनुभव था। उसके लिंग की भयावहता से में आतंकित हो गयी थी। किंतु … Continue reading कामिनी की कामुक गाथा (भाग 77)

कामिनी की कामुक गाथा (भाग 76)

पिछली कुछ कड़ियों में आपलोगों नें पढ़ा कि अपने नये मकान निर्माण कार्य में कार्यरत कामांध मजदूरों के समूह में, अपनी संभ्रांत छवि को त्याग कर उन्हीं के समकक्ष एक निम्नवर्गीय स्त्री की तरह शामिल हो कर अपने तन की भूख मिटाने हेतु बिछती चली गयी। उनके मनोनुकूल ढल कर, उनकी इच्छानुसार, प्रथमतय: दिखावे का … Continue reading कामिनी की कामुक गाथा (भाग 76)

कामिनी की कामुक गाथा (भाग 75)

पिछली कड़ी में आपलोगों नें पढ़ा कि किस तरह अपनी शारीरिक भूख मिटाने हेतु नित नये रोमांचकारी और जोखिम भरे प्रयोगात्मक तरीके इजाद करती हुई अपने यहां भवन निर्माण में कार्यरत मजदूरों से संसर्ग सुख प्राप्त करने का मन बना बैठी। पूर्वनिर्धारित योजना के तहत सारे कामगरों संग यौनक्षुधा शांत करने हेतु हमारे घर में … Continue reading कामिनी की कामुक गाथा (भाग 75)

कामिनी की कामुक गाथा (भाग 74)

पिछली कड़ी में आपलोगों नें पढ़ा कि अपने तन की वासनात्मक भूख मिटाने हेतु मैं अपने ही नये भवन के निर्माण में कार्यरत मजदूरों से संसर्ग सुख प्राप्त करने का जोखिम भरा निर्णय ले बैठी थी। उस नवीन, प्रयोगात्मक प्रयास में रोमांचकारी योजना भी बना बैठी। ऊपरवाले की मेहरबानी से सबकुछ वैसा ही होता गया जैसा … Continue reading कामिनी की कामुक गाथा (भाग 74)

कामिनी की कामुक गाथा (भाग 73)

पिछली कड़ी में आपलोगों नें पढ़ा कि किस तरह मैं अपनी कामक्षुधा में अंधी हो कर एक खुराफाती फैसला ले बैठी। अपने तन की वासना पूर्ति हेतु नित नये रोमांचक, जोखिम भरे अन्वेषण के क्रम में अपने नये भवन के निर्माण कार्य में लगे कामगरों से संसर्ग की घृणित मनोकामना के वशीभूत खुद को परोस … Continue reading कामिनी की कामुक गाथा (भाग 73)